भारत में कैंसर के इलाज को लेकर एक बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। दिल्ली उच्च न्यायालय के 12 जनवरी के फैसले ने देश में एक महंगी और चर्चित कैंसर दवा के सस्ते विकल्प का रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले के बाद भारत में कैंसर मरीजों को इम्यूनोथेरेपी उपचार कम कीमत पर उपलब्ध हो सकता है।
जिस दवा की बात हो रही है, उसका नाम निवोलुमैब (Nivolumab) है। यह दवा कई प्रकार के कैंसर के इलाज में प्रभावी मानी जाती है। फिलहाल इस दवा का पेटेंट वैश्विक फार्मा कंपनी ब्रिस्टल मायर्स-स्क्विब (Bristol Myers-Squibb – BMS) के पास है, जो भारत में इसके निर्माण और बिक्री के अधिकार रखती है। हालांकि, इस पेटेंट की अवधि मई महीने में समाप्त होने वाली है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित को ध्यान में रखते हुए भारतीय फार्मा कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज (Zydus Lifesciences) को इस दवा का ‘बायोसिमिलर’ संस्करण बनाने और बेचने की अनुमति दे दी है। बायोसिमिलर दवाएं मूल जैविक दवाओं की तरह ही प्रभावी होती हैं, लेकिन उनकी कीमत काफी कम होती है।
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अदालत के इस फैसले से यह उम्मीद बढ़ी है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं अब आम मरीजों की पहुंच में आ सकेंगी। वर्तमान में निवोलुमैब जैसी दवाओं का इलाज बेहद महंगा है, जिससे बड़ी संख्या में मरीज इलाज नहीं करा पाते।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल मरीजों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि भारत में सस्ती और सुलभ दवाओं के निर्माण को भी बढ़ावा देगा। यह कदम “मेक इन इंडिया” और किफायती स्वास्थ्य सेवा की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
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