नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में ई-रिक्शाओं के संचालन और नियंत्रण से जुड़े एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर दिल्ली सरकार और ट्रैफिक पुलिस से जवाब तलब किया है। यह याचिका शहर की सड़कों पर ई-रिक्शाओं के अनियंत्रित संचालन से उत्पन्न सुरक्षा जोखिमों को लेकर दाखिल की गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका मनीष पराशर द्वारा दायर की गई है, जिन्होंने पिछले वर्ष एक दर्दनाक सड़क हादसे में अपनी आठ वर्षीय बेटी को खो दिया था। बच्ची स्कूल जाते समय एक ई-रिक्शा दुर्घटना का शिकार हुई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि राजधानी में ई-रिक्शाओं के संचालन के लिए प्रभावी नियमों, ड्राइवरों की जांच और वाहनों की फिटनेस को लेकर गंभीर खामियां हैं।
अदालत ने दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम (एमसीडी) को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि ई-रिक्शाओं के नियमन, पंजीकरण, परमिट, चालकों के प्रशिक्षण और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि नियमों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई की जा रही है और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या ठोस योजना है।
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याचिका में कहा गया है कि बिना लाइसेंस, बिना प्रशिक्षण और बिना सुरक्षा मानकों के ई-रिक्शा चालक सड़कों पर चल रहे हैं, जिससे स्कूली बच्चों, पैदल यात्रियों और अन्य वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ रही है। अदालत का यह कदम राजधानी में सड़क सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अहम माना जा रहा है।
मामले की अगली सुनवाई में संबंधित विभागों से विस्तृत जवाब और उठाए गए उपायों की जानकारी देने को कहा गया है।
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