मुंबई में चुनाव ड्यूटी के लिए अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों की तैनाती को लेकर उठा विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी तक पहुंच गया है। मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आयुक्त भूषण गगरानी ने सोमवार (5 जनवरी 2026) को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि अदालत कर्मियों को चुनाव ड्यूटी के लिए बुलाने का उनका फैसला “गलती” था और उन्होंने इससे जुड़े सभी निर्देश वापस ले लिए हैं।
यह विवाद दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुआ था, जब बीएमसी आयुक्त ने जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए मुंबई की अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने के आदेश जारी किए। यह आदेश हाईकोर्ट के उस प्रशासनिक निर्णय के बावजूद दिया गया था, जिसमें अदालत कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट देने की बात कही गई थी। मुख्य महानगर दंडाधिकारी और रजिस्ट्रार (निरीक्षण) ने भी इस संबंध में आयुक्त को सूचित किया था।
इसके बावजूद 29 दिसंबर को आयुक्त ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को पत्र भेजकर अदालत कर्मचारियों को छूट देने के अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लिया। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने आयुक्त से सवाल किया, “आप किस प्रावधान के तहत यह अधिकार लेते हैं? आप उन्हें तलब नहीं कर सकते।”
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बीएमसी आयुक्त की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवि कदम ने अदालत को बताया कि सभी निर्देश औपचारिक रूप से वापस ले लिए गए हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए आयुक्त को सलाह दी कि वे “खुद को बचाएं” और चुनाव के लिए अन्य स्रोतों से कर्मचारियों की व्यवस्था करें। हाईकोर्ट ने पहले ही आयुक्त को अदालत और अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों से चुनाव ड्यूटी के लिए कोई भी पत्राचार करने से रोक दिया था।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत अधीनस्थ अदालतों पर पूर्ण नियंत्रण हाईकोर्ट का है और इसी आधार पर 2008 में अदालत कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का प्रशासनिक फैसला लिया गया था।
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