हरियाणा के सोनीपत से आने वाला एक वकील दंपती देश की न्यायिक व्यवस्था में एक प्रेरक मिसाल बन चुका है। योगिता कौशिक दहिया और उनके पति विनीट दहिया केवल वकील नहीं हैं, बल्कि उन मामलों में इंसाफ की आवाज हैं, जिन्हें समाज अक्सर देखने से भी कतराता है। दोनों दिल्ली की रोहिणी अदालतों में अतिरिक्त लोक अभियोजक (Additional Public Prosecutors) के रूप में कार्यरत हैं और अब तक 150 से अधिक मामलों में दोषसिद्धि दिला चुके हैं। इनमें से करीब 85 प्रतिशत मामले पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से जुड़े हैं।
सुबह चार बजे, जब पूरा सोनीपत सो रहा होता है, योगिता दहिया अपने दिमाग में जिरह की रणनीति दोहराना शुरू कर देती हैं। घर के एक शांत कमरे में वह और उनके पति मिलकर उन मुकदमों की तैयारी करते हैं, जिनमें बच्चों के साथ हुई सबसे क्रूर ज्यादतियों का सामना करना पड़ता है। शत्रुतापूर्ण गवाहों, धमकियों और रिश्वत के दबाव के बावजूद, उनका संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ता।
यह दंपती प्रथम पीढ़ी के वकीलों में से है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी पहचान बनाई। साधारण नाश्ते—पोहे—से दिन की शुरुआत करने वाले योगिता और विनीट की दिनचर्या अनुशासन और संवेदनशीलता का अनूठा मेल है। वे फास्ट ट्रैक अदालतों में उन मामलों की पैरवी करते हैं, जहां हर सुनवाई पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनती है।
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योगिता और विनीट कहते हैं कि उनके लिए न्याय केवल पेशा नहीं, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है। वे टूटे हुए बचपन की कहानियों को मजबूत कानूनी तर्कों में बदलते हैं, ताकि अपराधियों को सजा मिल सके। उनके काम ने यह साबित किया है कि समर्पण, ईमानदारी और साहस के साथ न्याय व्यवस्था में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है।
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