मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के नतीजों में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 की रात तक आए परिणामों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के गठबंधन ने जीत के आंकड़े के करीब पहुंचकर उद्धव ठाकरे के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया। यह पहली बार है जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना मुंबई की नगर निगम सत्ता से बाहर होती नजर आई है, जिस पर उनका और उनके परिवार का 25 वर्षों से अधिक समय तक नियंत्रण रहा था।
हालांकि, सत्ता गंवाने के बावजूद उद्धव ठाकरे पूरी तरह कमजोर नहीं पड़े हैं। चुनाव नतीजों से यह साफ हुआ कि उन्होंने मराठी वोट बैंक को अपने पक्ष में एकजुट रखने में सफलता हासिल की है। यही कारण है कि वह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रमुख विपक्षी नेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं।
2017 के बीएमसी चुनावों में शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं, जबकि तीन साल पहले गठित शिवसेना (यूबीटी) इस बार 64 सीटें जीतने में सफल रही। दूसरी ओर, खुद को ‘असली शिवसेना’ का दावेदार बताने वाले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट को मुंबई में केवल 27 सीटों पर संतोष करना पड़ा। यह परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि मुंबई के मुख्य मराठी बहुल इलाकों में ठाकरे परिवार ने शिंदे गुट पर बढ़त बनाई।
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बीजेपी–शिवसेना गठबंधन का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि शहरी मतदाताओं में गठबंधन की स्वीकार्यता बढ़ी है, जबकि मराठी अस्मिता और पारंपरिक वोट बैंक के मामले में उद्धव ठाकरे अब भी मजबूत स्थिति में हैं। कुल मिलाकर, ये नतीजे मुंबई की राजनीति में नए संतुलन और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अहम संकेत माने जा रहे हैं।
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