राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था और मजबूत कर दी है। आयोग ने इसके लिए फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती की है।
सीएक्यूएम की ओर से उठाए गए इस कदम का उद्देश्य दोनों राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं की प्रभावी निगरानी करना और समय रहते ऐसी गतिविधियों की पहचान कर उन्हें रोकना है। धान की कटाई के मौसम में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं से वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर पंजाब और हरियाणा के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास के इलाकों की हवा की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
आयोग ने बताया कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की रोकथाम के लिए पहले से संचालित समन्वित जमीनी निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया गया है। फ्लाइंग स्क्वॉड मौके पर जाकर स्थिति की निगरानी करेंगे और संबंधित क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के प्रयासों को गति देंगे।
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यह व्यवस्था विभिन्न स्तरों पर संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। निगरानी के दौरान खेतों और संभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पराली जलाने की घटनाओं को बढ़ने से पहले नियंत्रित किया जा सके।
सीएक्यूएम का यह कदम फसल अवशेष प्रबंधन और वायु प्रदूषण नियंत्रण के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। आयोग पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और कार्रवाई को लगातार मजबूत कर रहा है।
फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती से निगरानी तंत्र की सक्रियता बढ़ने और संबंधित अधिकारियों को मौके पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है। आयोग ने दोनों राज्यों में समन्वित तरीके से पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम पर जोर दिया है।
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