केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने खुलासा किया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांचे गए 7,000 से अधिक भ्रष्टाचार के मामले फिलहाल देश की विभिन्न अदालतों में लंबित पड़े हैं। इनमें से 379 मामले ऐसे हैं जो बीस साल से भी अधिक पुराने हैं और अब तक इन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
सीवीसी की रिपोर्ट के अनुसार, लंबित मामलों की इतनी बड़ी संख्या न केवल न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति को दर्शाती है बल्कि भ्रष्टाचार के मामलों में समय पर न्याय मिलने की गंभीर चुनौती को भी उजागर करती है। इन मामलों में कई उच्च पदस्थ अधिकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबित मुकदमों का बड़ा हिस्सा ऐसे मामलों का है जिनकी जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अदालतों में सुनवाई की धीमी रफ्तार के कारण फैसला अब तक नहीं आ पाया है। यह स्थिति भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करती है और आरोपी पक्ष को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाती है।
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सीवीसी ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बताई है। आयोग का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित न्याय न केवल दोषियों को दंडित करने के लिए आवश्यक है बल्कि यह सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
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