केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दर्द निवारक दवाओं, खासकर गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) और एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर सलाह जारी की है। इसमें लंबे समय तक या बार-बार इन दवाओं के सेवन से किडनी संबंधी जटिलताओं, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बताया गया है।
नई दिल्ली स्थित सीडीएससीओ की ओर से 21 सितंबर 2026 को जारी परिपत्र स्वास्थ्यकर्मियों, फार्मासिस्ट, खुदरा विक्रेताओं, वितरकों, अस्पतालों और आम लोगों के लिए है। इसमें कहा गया है कि एनएसएआईडी और एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार या लंबे समय तक नहीं किया जाना चाहिए।
सीडीएससीओ ने कहा कि इन दवाओं का इस्तेमाल केवल चिकित्सकीय जरूरत होने पर, उचित अवधि के लिए और पंजीकृत चिकित्सक की निगरानी में किया जाना चाहिए। पहले से किडनी की बीमारी या गुर्दे की कार्यक्षमता प्रभावित होने के जोखिम वाले लोगों को एनएसएआईडी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेने की विशेष हिदायत दी गई है।
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सलाह में लोगों से कहा गया है कि दर्द, बुखार या अन्य लक्षण बने रहने अथवा दोबारा होने पर खुद से दर्द निवारक या एंटीबायोटिक लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लें। एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल स्व-दवा के तौर पर या सामान्य वायरल संक्रमण जैसी स्थितियों में नहीं किया जाना चाहिए।
डॉक्टरों को एंटीबायोटिक्स का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने और एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूवर्डशिप के सिद्धांतों का पालन करने की सलाह दी गई है। अनावश्यक संयोजन उपचार, गलत दवा या खुराक और जरूरत से ज्यादा लंबे उपचार से बचने को कहा गया है।
फार्मासिस्ट और दुकानदारों को शेड्यूल एच, एच1 और अन्य पर्चे वाली दवाओं की बिक्री संबंधी नियमों का पालन करने को कहा गया है। अस्पतालों को उचित दवा लिखने, मरीजों की काउंसलिंग और निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी गई है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रण अधिकारियों से भी जागरूकता बढ़ाने को कहा गया है।
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