कर्नाटक के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल चामुंडी पहाड़ी पर इस वर्ष भी चामुंडेश्वरी रथोत्सव का आयोजन पूरी श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। चामुंडी पहाड़ी, जो मैसूरु शहर के निकट स्थित है, देवी चामुंडेश्वरी के प्रसिद्ध मंदिर के लिए जानी जाती है और यह स्थान स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।
रथोत्सव के दौरान देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को भव्य रूप से सजाए गए रथ में विराजमान कर मंदिर परिसर के चारों ओर परिक्रमा कराई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तगण रथ को खींचने और देवी के दर्शन करने के लिए उमड़ पड़े। पूरे आयोजन स्थल को पारंपरिक रीति-रिवाज़ों के अनुसार सजाया गया था, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।
चामुंडेश्वरी देवी को मैसूरु के शाही परिवार की कुलदेवी माना जाता है और यह मंदिर कर्नाटक के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में गिना जाता है। हर वर्ष यहाँ आयोजित होने वाला रथोत्सव स्थानीय परंपरा का अहम हिस्सा है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इस अवसर पर मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष सुरक्षा और व्यवस्था के इंतज़ाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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रथोत्सव के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और भक्ति गीतों के बीच देवी की आरती और पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुजारियों ने विधिवत अनुष्ठान संपन्न कराए, जिसके बाद रथ यात्रा प्रारंभ हुई। हज़ारों की संख्या में मौजूद भक्तों ने रथ को रस्सियों से खींचते हुए देवी का जयकारा लगाया और पूरे पहाड़ी क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।
चामुंडी पहाड़ी, जो समुद्र तल से काफी ऊँचाई पर स्थित है, पर्यटकों के लिए भी एक लोकप्रिय स्थल है और यहाँ से मैसूरु शहर का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। रथोत्सव के मौके पर पहाड़ी पर आने वाले वाहनों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिसके मद्देनज़र यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त रखा गया।
इस धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि चामुंडेश्वरी देवी के प्रति भक्तों की आस्था आज भी उतनी ही गहरी है, जितनी पीढ़ियों पहले थी। कर्नाटक की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत में चामुंडी पहाड़ी और यहाँ का रथोत्सव एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, जिसे संजोए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति लगातार प्रयासरत रहते हैं।
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