छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरदराज जिले नारायणपुर में प्रशासन की पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ बच्चों के लिए जीवनरक्षक स्वास्थ्य सुविधा बनकर सामने आई है। इस अभियान के जरिए ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में हृदय संबंधी बीमारियों की समय रहते पहचान की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उनका मुफ्त इलाज कराया जा रहा है।
प्रशासन का उद्देश्य ऐसे बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जिनके परिवार आर्थिक या भौगोलिक कारणों से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें दूरदराज के इलाकों में जाकर बच्चों की जांच कर रही हैं। जांच के दौरान हृदय से जुड़ी किसी समस्या के संकेत मिलने पर बच्चों को आगे की चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए विशेषज्ञ स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
‘प्रोजेक्ट धड़कन’ के माध्यम से बच्चों में जन्मजात हृदय रोग और अन्य हृदय संबंधी जटिलताओं की पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। समय पर बीमारी का पता चलने से बच्चों को उचित उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है और गंभीर स्थिति बनने से पहले चिकित्सा हस्तक्षेप संभव हो पाता है।
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प्रशासन के अनुसार, इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पात्र बच्चों को उपचार के लिए आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ रहा है। अभियान का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को केवल जिला मुख्यालय तक सीमित रखने के बजाय गांवों और दुर्गम क्षेत्रों तक विस्तार देना है।
नारायणपुर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में इस तरह की पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वास्थ्यकर्मियों और प्रशासन के समन्वित प्रयास से बच्चों की स्क्रीनिंग, बीमारी की पहचान और आवश्यक उपचार की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।
‘प्रोजेक्ट धड़कन’ इस बात का उदाहरण है कि योजनाबद्ध तरीके से स्वास्थ्य सेवाओं को दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाकर बच्चों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है। प्रशासन की यह पहल भविष्य में भी जरूरतमंद बच्चों को बेहतर और मुफ्त हृदय उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में जारी रहने की उम्मीद है।
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