छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित जेल अब केवल बंदियों को रखने की जगह नहीं रह गई है, बल्कि यह सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनकर उभर रही है। यहां महिला बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे अचार आत्मनिर्भरता और कौशल विकास की नई कहानी लिख रहे हैं।
रायपुर जेल प्रशासन ने महिला बंदियों को रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की है। इसी के तहत महिलाओं को अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे अपने हुनर का इस्तेमाल कर उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन अचारों को लोगों के बीच भी पसंद किया जा रहा है।
जेल अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना है। काम के माध्यम से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सक्षम बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, बल्कि उनमें जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच भी विकसित हो रही है।
और पढ़ें: अमृतसर में खुफिया सूचना पर कार्रवाई, 5.5 किलो हेरोइन और अत्याधुनिक पिस्तौल बरामद, चार आरोपी गिरफ्तार
रायपुर जेल में तैयार किए जा रहे अचार विभिन्न स्वादों और प्रकारों में बनाए जाते हैं। महिला बंदियां साफ-सफाई और गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हुए इन्हें तैयार करती हैं। इस पहल से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।
जेल प्रशासन का कहना है कि ऐसी गतिविधियां बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करती हैं। सजा पूरी होने के बाद जब वे समाज में वापस लौटेंगी, तो उनके पास एक कौशल होगा, जिससे वे अपना जीवन बेहतर तरीके से चला सकेंगी।
रायपुर जेल को अब एक ‘पुनर्वास केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से अपराध की पुनरावृत्ति को कम किया जा सकता है।
महिला बंदियों द्वारा बनाए गए अचार की पहल न केवल आत्मनिर्भरता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही अवसर मिलने पर लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह प्रयास जेल सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
और पढ़ें: मध्य प्रदेश में गायब बीएड कॉलेजों की जांच के लिए सरकार ने बनाई समिति