अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि चीन ने वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ हुई हिंसक झड़प के कुछ ही दिनों बाद गुप्त परमाणु विस्फोट परीक्षण किए थे। यह दावा अमेरिकी विदेश विभाग के अंडर सेक्रेटरी थॉमस जी डिनैनो ने हाल ही में किया। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इन परीक्षणों को सीधे तौर पर गलवान झड़प से जोड़ना उचित नहीं होगा, क्योंकि परमाणु परीक्षण की तैयारी में महीनों लगते हैं।
मई 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष में 40 से अधिक चीनी सैनिकों के मारे जाने की आशंका जताई गई थी, लेकिन चीन ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है।
डिनैनो ने कहा कि चीन ने परमाणु विस्फोट परीक्षण किए और भूकंपीय निगरानी से बचने के लिए “डिकपलिंग” तकनीक का इस्तेमाल किया। यह तकनीक परीक्षण के प्रभाव को छिपाने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि 22 जून 2020 को चीन ने सैकड़ों टन क्षमता वाला एक परमाणु परीक्षण किया। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार मौजूद हैं।
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चीन ने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया है और न ही पूरी तरह खारिज किया है। संयुक्त राष्ट्र में निरस्त्रीकरण मामलों के लिए चीन के राजदूत शेन जियान ने कहा कि चीन परमाणु मामलों में हमेशा जिम्मेदार रहा है और अमेरिका पर हथियारों की होड़ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
डिनैनो ने यह भी कहा कि 2010 में अमेरिका और रूस के बीच हुआ न्यू स्टार्ट समझौता अब वर्तमान परिस्थितियों में अप्रासंगिक हो गया है। उनका कहना है कि रूस के बड़े परमाणु भंडार का केवल एक हिस्सा ही इस समझौते में शामिल था और चीन के परमाणु हथियार इसमें बिल्कुल शामिल नहीं थे। उन्होंने नई वैश्विक सुरक्षा संरचना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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