केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में कहा कि भारत के समुद्री खाद्य (सीफूड) क्षेत्र में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए केवल कच्चे मछली निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर ध्यान देना होगा।
चिराग पासवान ने कहा कि भारत को अब रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक सीफूड उत्पादों के उत्पादन और निर्यात पर अधिक जोर देना चाहिए, ताकि वैश्विक बाजार की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कार्यक्रम के दौरान विशाखापत्तनम में आयोजित एक बैठक में उन्होंने कहा कि भारतीय समुद्री उत्पादों की गुणवत्ता विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी है, लेकिन प्रसंस्करण और पैकेजिंग के क्षेत्र में और सुधार की जरूरत है।
और पढ़ें: ओडिशा में राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा के देबाशीष समंतराय ने भरा नामांकन
उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत अपने सीफूड सेक्टर को आधुनिक तकनीक और प्रोसेसिंग यूनिट्स से जोड़ता है, तो यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे सकता है। विशेष रूप से तटीय राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में इस उद्योग के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं।
चिराग पासवान ने उद्योग जगत और सरकार से मिलकर काम करने की अपील की ताकि भारतीय सीफूड उत्पादों को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान मिल सके। उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन के बिना निर्यात की क्षमता सीमित रह जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह फोकस भारत के समुद्री निर्यात को नई दिशा दे सकता है और किसानों एवं मछुआरों की आय बढ़ाने में मदद कर सकता है।
और पढ़ें: गुजरात में नए शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तक वितरण युद्धस्तर पर जारी, छात्रों को समय पर किताबें देने की तैयारी