दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके और सह-संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका को एहतियातन गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, तीनों नेताओं को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। उन पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है। ये धाराएं शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा और संज्ञेय अपराध रोकने के उद्देश्य से गिरफ्तारी से संबंधित हैं।
तीनों नेता शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर होने वाले सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से उतरने के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।
प्रदर्शन से पहले पुलिस ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार भी शामिल बताए गए। इनमें से अधिकांश लोगों को बाद में छोड़ दिया गया। हालांकि, अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और यूट्यूबर ध्रुव राठी हिरासत में बने रहे।
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सीजेपी ने अपने नेताओं की हिरासत का विरोध करते हुए उनकी रिहाई की मांग की है। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने और रविवार को फिर जंतर-मंतर पर जुटने की अपील की।
विपक्ष का समर्थन, बीजेपी का पलटवार
आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सीजेपी के आंदोलन का समर्थन किया। अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी सहित कई नेताओं को हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया गया। कांग्रेस ने हालांकि इस आंदोलन से दूरी बनाए रखी।
भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार के प्रदर्शन को विफल बताते हुए विपक्षी दलों पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश में अशांति फैलाने का आरोप लगाया। बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में देश संसद से चलेगा, सड़कों से नहीं। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष प्रदर्शन के जरिए अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश कर रहा है, जबकि विपक्षी दल सीजेपी की मांगों और प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन कर रहे हैं।
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