धर्मांतरण फंडिंग के आरोपों का सामना कर रहे कांग्रेस पार्षद ने दो महीने तक फरार रहने के बाद इंदौर की स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। पार्षद पर आपराधिक साजिश रचने और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ व्यापक तलाशी अभियान चलाया था।
सूत्रों के अनुसार, पार्षद पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से धर्मांतरण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की। इस मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कई ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन वे लगातार फरार रहे। आखिरकार उन्होंने शुक्रवार को अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।
अदालत ने पार्षद को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और पुलिस अब उनसे पूछताछ की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि धर्मांतरण गतिविधियों में और कौन-कौन लोग शामिल थे और वित्तीय लेन-देन के स्रोत क्या थे।
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भाजपा नेताओं ने इस घटना को लेकर कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी के कई नेता धार्मिक स्वतंत्रता कानून का उल्लंघन कर रहे हैं और समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की कार्रवाई है और पार्षद को झूठे आरोपों में फंसाया जा रहा है।
इस घटना ने इंदौर समेत पूरे मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाएगी।
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