कांग्रेस पार्टी लंबे समय से इस धारणा से जूझती रही है कि उसके कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय ही ज़मीनी स्तर पर सक्रिय दिखाई देते हैं और चुनाव समाप्त होते ही गायब हो जाते हैं। झारखंड में अब इस छवि को बदलने के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रभारी के. राजू एक नया संगठनात्मक मॉडल आज़मा रहे हैं, जिसका उद्देश्य सालभर लगातार जनसंपर्क और जमीनी जुड़ाव बनाए रखना है।
पूर्व नौकरशाह से राजनेता बने के. राजू ने झारखंड में पार्टी संगठन को मज़बूत करने के लिए एक साल का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर तैयार किया है। इस योजना के तहत राज्य की लगभग 4,350 ग्राम पंचायतों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की नियमित भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पार्टी का लक्ष्य है कि वह केवल चुनावी राजनीति तक सीमित न रहकर स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं और सामाजिक सरोकारों पर लगातार सक्रिय रहे।
इस सालाना कैलेंडर में गांव-गांव जाकर जनसंवाद, स्थानीय समस्याओं पर चर्चा, संगठनात्मक बैठकें, सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी और जनहित से जुड़े अभियानों को शामिल किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि इस निरंतर संपर्क से न केवल पार्टी की संगठनात्मक मजबूती बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों के साथ विश्वास और संवाद भी कायम होगा।
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कांग्रेस के भीतर यह स्वीकार किया जाता रहा है कि चुनाव के बीच के समय में पार्टी की सक्रियता कम हो जाती है, जिसका फायदा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उठाते हैं। झारखंड में अपनाया जा रहा यह मॉडल उसी कमी को दूर करने का प्रयास माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि अगर कार्यकर्ता सालभर जनता के बीच रहेंगे, तो उनकी समस्याओं की बेहतर समझ बनेगी और समाधान के लिए दबाव भी प्रभावी ढंग से बनाया जा सकेगा।
झारखंड में यह प्रयोग सफल रहता है तो कांग्रेस इसे अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है। पार्टी इसे दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देख रही है, जिससे संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से मज़बूती मिल सके।
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