भारत के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को सिंधी भाषा में भारतीय संविधान के नवीनतम संस्करण का विमोचन किया। यह कार्यक्रम उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया, जहां इस विशेष संस्करण को आधिकारिक रूप से जारी किया गया।
इस संविधान को सिंधी भाषा में दो लिपियों—देवनागरी और फारसी—में प्रकाशित किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें। यह कदम देश की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संविधान देश की आत्मा है और इसे विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराना लोकतंत्र को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न भाषाई समुदायों को संविधान के मूल सिद्धांतों को समझने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हर भाषा का अपना महत्व है और सभी भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए। सिंधी भाषा में संविधान का यह संस्करण विशेष रूप से सिंधी समुदाय के लिए उपयोगी होगा, जिससे वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक हो सकेंगे।
यह पहल न केवल संविधान के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देगी, बल्कि देश की एकता और अखंडता को भी मजबूत करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से भारतीय लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी तथा लोगों में संवैधानिक जागरूकता बढ़ेगी।
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