राजधानी दिल्ली का चित्तरंजन पार्क (सीआर पार्क), जिसे ‘मिनी कोलकाता’ भी कहा जाता है, दुर्गा पूजा के लिए सज रहा है। बंगाली समुदाय के प्रमुख त्योहार की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कलाकार दुर्गा प्रतिमाओं और पूजा पंडालों को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस वर्ष कई पंडालों में देशभक्ति, बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और बांग्ला भाषा को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
जीके-2 दुर्गोत्सव में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष
ग्रेटर कैलाश मेट्रो स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर दूर जीके-2 दुर्गोत्सव का पंडाल इस बार ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ की थीम पर तैयार किया गया है। दुर्गोत्सव समिति के उपाध्यक्ष सम्राट बनर्जी ने बताया कि आयोजन के जरिए आज के जीवन में ‘वंदे मातरम’ के वास्तविक अर्थ को सामने लाने की कोशिश की जा रही है। पंडाल में अवनींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कलाकृति ‘बंगमाता’ सहित विभिन्न कला रूप देखने को मिलेंगे। गीत, संगीत और नाटकों के जरिए रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। समिति पूरे वर्ष सोशल मीडिया के माध्यम से इस विरासत को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
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को-ऑपरेटिव ग्राउंड में दिखेगी जूट की विरासत
जीके-2 से करीब एक किलोमीटर दूर को-ऑपरेटिव ग्राउंड दुर्गा पूजा में बंगाल की समृद्ध जूट विरासत को दर्शाया जाएगा। आयोजन के 51वें वर्ष में पंडाल और विभिन्न कलाकृतियां जूट तथा बांस से बनाई जा रही हैं। समिति के सांस्कृतिक सचिव कल्लोल आचार्य ने बताया कि रामकृष्ण मिशन, नई दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद के उद्घाटन के बाद पंडाल 15 अक्टूबर, गुरुवार को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
सीआर पार्क में बी-ब्लॉक, नवपल्ली यानी पॉकेट-40, डी-ब्लॉक, पूर्वाचल और मिलन समिति के दुर्गा पूजा पंडाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
अलकनंदा में ‘सहज पाठ’ की झलक
सीआर पार्क से बाहर पंडाल देखने जाने वाले लोग अलकनंदा स्थित कात्यायनी ट्रस्ट का पंडाल भी देख सकते हैं। यहां रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध बांग्ला प्रारंभिक पुस्तक ‘सहज पाठ’ को थीम बनाया गया है।
ट्रस्ट के सचिव अर्णब भट्टाचार्य के अनुसार, प्रवासी बंगाली बच्चों के लिए अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़ना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। यह पंडाल बंगाल की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है।
मेट्रो से कैसे पहुंचें?
सीआर पार्क के लिए नेहरू एन्क्लेव मेट्रो स्टेशन (मैजेंटा लाइन) सुविधाजनक विकल्प है। ग्रेटर कैलाश मेट्रो स्टेशन से भी पहुंचा जा सकता है। दोनों स्टेशन से संबंधित पंडालों तक लगभग 5 से 10 मिनट में पहुंचा जा सकता है।
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