राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों का निर्धारित स्थल नहीं रहेगा। दिल्ली पुलिस के इस फैसले पर कारोबारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों के व्यापारियों ने त्योहारों के मौसम में राहत मिलने की उम्मीद जताई है, जबकि कुछ अन्य व्यापारिक संगठनों ने नई व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की है।
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) ने जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल हटाने के फैसले का स्वागत किया है। संगठन का मानना है कि इससे कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों में कारोबार करने वाले व्यापारियों को त्योहारों के दौरान राहत मिल सकती है। प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित होने और ग्राहकों की आवाजाही में बाधा आने की आशंका रहती है, जिससे दुकानदारों के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, अन्य दो व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले को लेकर आशंकाएं जताई हैं। उनका मानना है कि प्रदर्शन स्थलों में बदलाव से व्यापार और शहर की व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करना जरूरी है। इस तरह, जहां कुछ व्यापारी फैसले को राहत के रूप में देख रहे हैं, वहीं अन्य इसके संभावित परिणामों को लेकर सतर्क हैं।
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दिल्ली पुलिस ने जारी किया आदेश
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक स्थायी आदेश जारी कर जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया। इसके साथ ही विरोध-प्रदर्शनों के आयोजन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान तय किए गए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान शामिल हैं।
यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया। समिति को राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक स्थानों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब नए स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित किए जाने से राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलेगा।
व्यापारिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि इस फैसले को लेकर राहत और चिंता, दोनों तरह की भावनाएं हैं। आने वाले त्योहारों के दौरान नई व्यवस्था का कारोबार और यातायात पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।
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