दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समन से जुड़े दो मामलों में बरी कर दिया। ये मामले दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित जांच के दौरान ईडी द्वारा जारी किए गए छह समनों में पेश न होने को लेकर दर्ज किए गए थे।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि “केवल समन के बाद उपस्थित न होना, जानबूझकर अवज्ञा नहीं माना जा सकता।” अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए यह साबित होना आवश्यक है कि उसने जानबूझकर और इरादतन किसी सार्वजनिक सेवक के आदेश की अवहेलना की हो।
ईडी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ फरवरी और मार्च 2024 में दो आपराधिक मामले दर्ज किए थे। ये मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 174 के तहत दर्ज किए गए थे, जो किसी सार्वजनिक सेवक के आदेश पर उपस्थित न होने से संबंधित है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत ईडी को यह अधिकार प्राप्त है कि वह समन की जानबूझकर अवहेलना की स्थिति में IPC की धारा 174 के तहत आपराधिक कार्यवाही शुरू कर सके।
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अदालत के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे सत्य की जीत बताया। अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “सत्यमेव जयते।”
आप नेताओं का कहना है कि यह फैसला राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को कमजोर करता है और यह साबित करता है कि कानून के दायरे में रहकर ही किसी भी जांच एजेंसी को कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय समन और उसकी अवहेलना से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
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