दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति (कमेटी ऑफ प्रिविलेजेज) ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं के खिलाफ “उचित कार्रवाई” करने की सिफारिश की है। यह मामला विधानसभा परिसर में कथित तौर पर बनाए गए एक “फर्जी” फांसी घर (एग्जीक्यूशन रूम) के उद्घाटन से जुड़ा है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अरविंद केजरीवाल, तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक राखी बिड़ला ने समिति की बैठकों में जानबूझकर अनुपस्थिति दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार, ये बैठकें 13 नवंबर 2025 और 20 नवंबर 2025 को निर्धारित थीं, लेकिन संबंधित सदस्यों ने न तो किसी वैध कारण का उल्लेख किया और न ही समिति से अनुमति ली।
रिपोर्ट में कहा गया है, “समिति यह सिफारिश करती है कि सदन इन सदस्यों की जानबूझकर अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ उचित और आवश्यक कार्रवाई करे।” समिति का मानना है कि इस तरह का रवैया विधानसभा की समितियों की गरिमा और अधिकारों को कमजोर करता है।
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दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि समिति की इस रिपोर्ट को बुधवार (7 जनवरी, 2026) को सदन में चर्चा के लिए रखा जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि सदन इस मुद्दे पर विस्तार से विचार करेगा और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
गौरतलब है कि “फर्जी फांसी घर” के उद्घाटन को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद खड़ा हो चुका है। विपक्षी दलों ने इसे जनता को गुमराह करने और संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया था। अब विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के बाद यह मामला एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है।
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