दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को कहा कि पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटना “दुर्भाग्यपूर्ण” है और किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि कानून के दायरे में हो रहे कार्यों में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना उस समय हुई जब नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) अदालत के आदेश के तहत मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान के पास अतिक्रमित भूमि पर तोड़फोड़ की कार्रवाई कर रहा था। इस दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर पुलिस बल पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिससे कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और पूछताछ के लिए पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है।
गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि मस्जिद के आसपास कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठान अवैध रूप से बनाए गए थे, जिनके खिलाफ अदालत के निर्देशों के अनुपालन में कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने कहा, “कानून के तहत किए जा रहे कार्यों में रुकावट डालना या उन्हें बाधित करना पूरी तरह अस्वीकार्य है।”
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उन्होंने यह भी कहा कि कुछ “आपराधिक और शरारती तत्वों” ने जानबूझकर प्रदर्शन और हिंसा का सहारा लिया, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मंत्री ने बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अब तक पांच लोगों को पकड़ा जा चुका है।
आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि फैज़-ए-इलाही मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और तोड़फोड़ की कार्रवाई केवल उन्हीं अवैध व्यावसायिक ढांचों तक सीमित है, जो अदालत के आदेशों के दायरे में आते हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे में न आने की अपील की और कहा कि शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन का सहयोग करें।
एमसीडी के उप आयुक्त विवेक कुमार ने भी पुष्टि की कि कार्रवाई के दौरान मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के तहत लगभग 36,000 वर्ग फुट अतिक्रमित क्षेत्र को खाली कराया गया, जिसमें एक डायग्नोस्टिक सेंटर, एक मैरिज हॉल और दो दो-मंजिला चारदीवारी शामिल थीं। मलबा हटाने का काम अभी जारी है।
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