दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को गूगल और एप्पल को नोटिस जारी किया है और उनसे कार्रवाई करने को कहा है। यह नोटिस उस पीआईएल के आधार पर दिया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि मोबाइल ऐप्स पर अश्लील और अवैध सामग्री उपलब्ध है।
न्यायालय ने कहा कि ऐप स्टोर संचालित करने वाले इंटरमीडियरीज के पास सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स को न केवल अवैध सामग्री को रोकने के लिए सतर्कता बरतनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके माध्यम से कोई अश्लील या अपराध से जुड़ी सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न हो।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मोबाइल ऐप्स के माध्यम से संवैधानिक और कानूनी सीमाओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। न्यायालय ने दोनों कंपनियों को निर्देश दिए कि वे पीआईएल में उठाए गए आरोपों की जांच करें और उपयुक्त कार्रवाई करें।
और पढ़ें: केजरीवाल के पत्र पर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन उपाध्यक्ष सख्त, कहा—न्यायपालिका का राजनीतिकरण गलत
साथ ही, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि नियमों के तहत ऐप स्टोर संचालकों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ, तो सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। अदालत ने यह नोट किया कि तकनीकी प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों का पालन करना अनिवार्य है।
पीआईएल में यह आरोप लगाया गया है कि कई लोकप्रिय मोबाइल ऐप्स पर अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री बच्चों और युवा वर्ग तक आसानी से पहुँच रही है। अदालत ने गूगल और एप्पल को निर्देश दिया कि वे उचित निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित करें ताकि किसी भी अवैध सामग्री का प्रसार रोका जा सके।
और पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एन रंगास्वामी को पुदुचेरी मुख्यमंत्री पद संभालने पर बधाई दी