दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को सात यूएपीए मामलों में जमानत दे दी। जोहल पर पंजाब के लुधियाना और जालंधर जिलों में 2016-2017 के दौरान कथित लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयासों से जुड़े मामलों में मुकदमा चल रहा है। इन मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र की खंडपीठ ने जोहल की ओर से दायर जमानत अपीलों को स्वीकार किया। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश का अभी इंतजार है। जोहल को नवंबर 2017 में पंजाब से गिरफ्तार किया गया था। वह सात हत्या और यूएपीए मामलों में आरोपी हैं।
2024 में खारिज हुई थी जमानत याचिका
इससे पहले 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने जोहल की जमानत अपीलें खारिज कर दी थीं। उस समय अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही मानने के आधार मौजूद हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को जमानत अपीलों पर नए सिरे से फैसला करने को कहा था।
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18 सितंबर 2025 को भी दिल्ली हाईकोर्ट ने यूएपीए के तहत दर्ज कई मामलों में जोहल को जमानत देने से इनकार किया था। तब जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनआईए द्वारा जांच किए जा रहे सात मामलों में निचली अदालत के जमानत से इनकार करने वाले आदेशों के खिलाफ उनकी अपीलें खारिज कर दी थीं।
पंजाब पुलिस से एनआईए को सौंपी गई जांच
अदालत के अनुसार, बाद में इन मामलों की जांच पंजाब पुलिस से एनआईए को सौंप दी गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले कथित तौर पर राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को अस्थिर करने की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा थे।
एनआईए ने जोहल का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि वह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के सक्रिय सदस्य थे और कथित तौर पर हथियार खरीदने के लिए दो शूटरों को धन उपलब्ध कराने में शामिल थे।
पिछली सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच अपीलों को कानूनी समयसीमा के बाद दायर किए जाने के कारण खारिज किया था, जबकि दो अन्य अपीलों को गुण-दोष के आधार पर खारिज किया गया था। अब नई सुनवाई के बाद अदालत ने सात मामलों में जमानत मंजूर कर दी है।
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