दिल्ली पुलिस ने बुधवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर नियम स्पष्ट करते हुए कहा कि यहां शांतिपूर्ण और स्वीकृत प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन इसके लिए कम से कम 10 दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर अधिकतम 1,000 लोगों के जुटने की अनुमति है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर INDIA ब्लॉक के सांसद जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन करना चाहते थे। पुलिस ने बुधवार को उन्हें रास्ते में रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के बाद जारी स्थायी आदेश के तहत जंतर-मंतर पर धरना, प्रदर्शन और विरोध सभाओं के लिए सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति जरूरी है। अनुमति के लिए आवेदन नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त के पास प्रस्तावित कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन पहले देना होता है।
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नियमों के मुताबिक, 1,000 से अधिक लोगों की भीड़ वाले प्रदर्शन को अन्य निर्धारित स्थानों पर आयोजित करना होगा। 1,000 से 50,000 लोगों तक की सभा के लिए रामलीला मैदान और 50,000 से अधिक लोगों की सभा के लिए बुराड़ी को निर्धारित किया गया है। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में भी प्रदर्शन पर प्रतिबंध है।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 में कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और स्थानीय निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्था बनाई जा सकती है।
राहुल और प्रियंका गांधी समेत कई नेता हिरासत में
बुधवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई विपक्षी सांसद जंतर-मंतर की ओर बसों से जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें जनपथ और अशोक रोड के पास रोक दिया। इसके बाद नेताओं ने सड़क पर धरना शुरू कर दिया।
प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य महिला नेताओं के साथ सड़क पर लेट गईं और संविधान की प्रति हाथ में रखी। पुलिस ने बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया।
इससे पहले विपक्षी सांसदों ने मध्य दिल्ली के एक रेस्तरां में दोपहर का भोजन किया था, जिसके बाद वे जंतर-मंतर के लिए रवाना हुए। यह प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन हुआ, जिसमें विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
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