दिल्ली के रेड फोर्ट (लाल किला) के बाहर हुए विस्फोट मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। अदालत ने इस मामले के आरोपी यासिर अहमद डार को 11 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह आदेश सोमवार (5 जनवरी 2026) को पारित किया गया, जब आरोपी को शारीरिक रूप से अदालत में पेश किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चंदना ने यासिर अहमद डार को 16 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया। इससे पहले 26 दिसंबर को अदालत ने उसकी एनआईए हिरासत को 10 दिनों के लिए बढ़ाया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 18 दिसंबर को डार को इस मामले में गिरफ्तार किया था, और वह इस आतंकी हमले में नौवां आरोपी बताया गया है।
एनआईए के अनुसार, जम्मू-कश्मीर का निवासी यासिर अहमद डार आत्मघाती हमलावर उमर-उन-नबी का करीबी सहयोगी था। उमर-उन-नबी ही वह व्यक्ति था, जो विस्फोटकों से भरी कार चलाकर 10 नवंबर को लाल किले के बाहर पहुंचा था, जहां धमाका हुआ। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
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जांच एजेंसी का आरोप है कि यासिर अहमद डार ने इस विस्फोट की साजिश रचने में सक्रिय भूमिका निभाई। एनआईए का कहना है कि वह अन्य आरोपियों, जिनमें उमर-उन-नबी और मुफ्ती इरफान शामिल हैं, के लगातार संपर्क में था। एजेंसी ने यह भी बताया कि डार ने हमले की योजना, समन्वय और क्रियान्वयन में अहम योगदान दिया।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा है, जबकि एनआईए आगे की जांच जारी रखे हुए है। इस केस को देश की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला माना जा रहा है।
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