संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र गुरुवार से शुरू हो रहा है, जिसमें केंद्र सरकार तीन अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। इनका उद्देश्य लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण, सदन की संख्या बढ़ाना और महिला आरक्षण को लागू करना है।
विपक्ष ने इन विधेयकों का विरोध करते हुए कहा है कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विभाजन बढ़ेगा। हालांकि विपक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि परिसीमन को लेकर सरकार कुछ “चालें” चल रही है, और विपक्ष संसद में इसका एकजुट होकर विरोध करेगा।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 किया जाएगा। यह बदलाव 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू किया जा सके।
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परिसीमन के बाद राज्यों की सीटों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी, महाराष्ट्र की 48 से 72, पश्चिम बंगाल की 42 से 63, बिहार की 40 से 60 और तमिलनाडु की 39 से 59 सीटें हो जाएंगी। इसके अलावा मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और केरल में भी सीटों में बढ़ोतरी होगी।
केंद्र सरकार का कहना है कि “प्रो राटा विस्तार” मॉडल के तहत सभी राज्यों की सीटों में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इससे राज्यों के बीच मौजूदा राजनीतिक संतुलन बना रहेगा और उत्तर-दक्षिण विभाजन की आशंकाएं कम होंगी।
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि उन्हें भी अनुपातिक रूप से फायदा मिलेगा।
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