भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अग्नि MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर तट के पास किया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जल्द ही इस पर आधिकारिक बयान दे सकते हैं।
अग्नि-6 परियोजना को लेकर चर्चा तेज
इस परीक्षण के बाद लंबे समय से चर्चा में रही अग्नि-6 मिसाइल परियोजना को लेकर भी हलचल बढ़ गई है। डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने पिछले महीने कहा था कि मिसाइल परियोजना पूरी तरह तैयार है और अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार है।
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उन्होंने कहा था कि डीआरडीओ किसी भी समय लॉन्च के लिए तैयार है, जैसे ही सरकार अनुमति देगी।
6,000 से 10,000 किलोमीटर तक मारक क्षमता
अग्नि-6 मिसाइल की अनुमानित रेंज 6,000 से 10,000 किलोमीटर के बीच मानी जा रही है। यह मिसाइल भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करेगी तथा देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगी।
इसमें MIRV तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे यह एक साथ कई परमाणु हथियार अलग-अलग लक्ष्यों पर दागने में सक्षम होगी।
स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली का भी परीक्षण
इसी बीच ओडिशा तट पर एक और महत्वपूर्ण परीक्षण किया गया, जिसमें स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण हुआ।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य बिना निर्देशित हथियारों को सटीक निशाने वाले हथियारों में बदलना है।
यह प्रणाली हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई है। इसका उद्देश्य कम लागत में उच्च सटीकता के साथ दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करना है।
रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और RCI की सराहना की है, इसे भारत की रक्षा तकनीक में एक बड़ी सफलता बताया गया है।
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