दिल्ली में आयोजित आईपीएल 2026 के दौरान अरुण जेटली स्टेडियम में टिकट घोटाले और कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद तब सामने आया जब एक औपचारिक शिकायत दिल्ली पुलिस को दी गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि स्टेडियम के हॉस्पिटैलिटी बॉक्स में वैध टिकट होने के बावजूद कुछ मेहमानों को प्रवेश नहीं दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि असली फिजिकल टिकटों का इस्तेमाल “अनधिकृत लोगों” द्वारा किया जा रहा था।
डीडीसीए निदेशक के गंभीर आरोप
डीडीसीए के एक निदेशक की शिकायत में दावा किया गया है कि स्टेडियम में आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह विफल हो गई है। यह भी आशंका जताई गई है कि स्टेडियम स्टाफ और फर्जी टिकट इस्तेमाल करने वालों के बीच मिलीभगत हो सकती है।
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दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने अरुण जेटली स्टेडियम और उसके आसपास निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ लोग वीआईपी और हॉस्पिटैलिटी टिकटों को उनकी असली कीमत से 5 से 10 गुना अधिक दाम पर बेच रहे थे।
कुछ मामलों में उच्च गुणवत्ता वाले फर्जी टिकट भी पाए गए, जो सुरक्षा जांच को पार करने में सफल रहे। पुलिस ने स्टेडियम के आसपास टिकट बेचने वाले कई लोगों को हिरासत में लिया है।
अन्य शहरों में भी फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसा ही गिरोह बेंगलुरु और हैदराबाद में भी सक्रिय था, जो फर्जी वीआईपी लेटर के जरिए बड़ी संख्या में टिकट हासिल कर रहा था।
आम दर्शक बने शिकार
इस घोटाले का सबसे ज्यादा नुकसान आम क्रिकेट प्रेमियों को हुआ है। कई दर्शक अधिकृत नहीं स्रोतों से टिकट खरीदकर पहुंचे, लेकिन उनके बारकोड अमान्य पाए गए, जिससे स्टेडियम के गेट नंबर 2 और 3 पर तनाव की स्थिति बन गई।
दिल्ली पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
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