तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर पार्टी के आधिकारिक नाम ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और उसके “फूल एवं घास” चुनाव चिन्ह पर रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी और अरूप रॉय-रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुट इनका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
आयोग ने दोनों गुटों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन-तीन नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिन्ह बताने को कहा है। दोनों गुट अपने प्रस्तावित नामों में मूल पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का संदर्भ रखने का विकल्प भी चुन सकते हैं।
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और अरूप रॉय-रितब्रत बनर्जी के गुट को टीएमसी के दो प्रतिद्वंद्वी समूहों के रूप में मान्यता दी है। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश के पैराग्राफ 15 के तहत विवाद की सुनवाई के बाद किया जाएगा।
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यह आदेश 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले आया है। दोनों गुट इन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुके हैं।
टीएमसी में विवाद की शुरुआत 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद हुई। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बगावत सामने आई। जून की शुरुआत में उन्होंने करीब 80 में से 60 विधायकों के समर्थन का दावा किया था। बाद में 22 जून को उनके गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने और अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाने का दावा किया। ममता समर्थकों ने इस कदम को खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार के लिए चुनाव आयोग पहुंच गए।
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