केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने मंगलवार को सर्वदलीय बैठक के बाद जानकारी दी कि आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी 2026 को संसद में पेश किया जाएगा, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत किया जाएगा। इस बैठक में 39 राजनीतिक दलों के 51 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के बाद रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र जनप्रतिनिधियों को जनता की आवाज उठाने का मंच देता है। “सदन में किसी भी तरह का व्यवधान या हंगामा नहीं होना चाहिए। सभी सदस्यों को एक-दूसरे की बात सुननी चाहिए और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए”।
परंपरागत रूप से आर्थिक सर्वेक्षण हर साल बजट से पहले संसद के दोनों सदनों में भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) द्वारा पेश किया जाता है। यह सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (आर्थिक प्रभाग) द्वारा तैयार किया जाता है और देश की आर्थिक स्थिति का विस्तृत खाका प्रस्तुत करता है।
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आर्थिक सर्वेक्षण के अनुमानों और वास्तविक आर्थिक प्रदर्शन की तुलना करें तो कई बार भारत की आर्थिक वृद्धि दर अनुमानों से अधिक रही है। वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है, जबकि सर्वेक्षण में इसे 6.3% से 6.8% के बीच आंका गया था।
2023-24 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 9.2% रही, जबकि अनुमान 6-6.8% था।
हालांकि 2024-25 में वृद्धि 6.5% रही, जो अनुमानित 6.5-7% के अनुरूप थी।
2022-23 में लक्ष्य चूक गया, जब वास्तविक वृद्धि 7.6% रही, जबकि अनुमान 8-8.5% था।
2021-22 में कोविड के कारण कोई अनुमान नहीं दिया गया था, लेकिन वृद्धि 9.7% रही, जबकि 2020-21 में महामारी और लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था 5.8% सिकुड़ गई थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। बजट से ठीक पहले आने वाला आर्थिक सर्वेक्षण सरकार की आर्थिक सोच की दिशा तय करता है और नई नीतियों से पहले देश की वित्तीय स्थिति की स्पष्ट तस्वीर देता है।
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