पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर कथित चुनाव बाद हिंसा के विरोध में कोलकाता में एक दिवसीय धरना दिया। हालांकि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी—टीएमसी के अधिकांश सांसद और विधायक मंच से नदारद रहे।
अतीत में जब भी ममता बनर्जी किसी आंदोलन या धरने पर बैठी हैं, पार्टी के सांसदों और विधायकों की बड़ी संख्या उनके साथ दिखाई देती रही है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग थी। टीएमसी के पास अभी भी 78 विधायक हैं, हालांकि इनमें से हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित किया गया है। इसके अलावा लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर पार्टी के 41 सांसद हैं। इसके बावजूद धरना स्थल पर केवल पांच सांसद और कुछ चुनिंदा विधायक ही मौजूद नजर आए।
धरना स्थल पर ममता बनर्जी के साथ विधायक नैना दास बनर्जी, मदन मित्रा, फिरहाद हकीम, बिमान बनर्जी, अशोक देब और सोवंदेब चट्टोपाध्याय मौजूद थे। वहीं सांसदों में डेरेक ओ'ब्रायन, समीरुल इस्लाम, डोला सेन, माला रॉय और कल्याण बनर्जी ने कार्यक्रम में भाग लिया।
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इसके अलावा चुनाव में पराजित उम्मीदवार चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखिल गिरी और तनमय घोष भी ममता के साथ मंच पर बैठे दिखाई दिए। नगर निकायों के प्रतिनिधियों में वैश्वनर चटर्जी, कृष्णा चक्रवर्ती और स्वपन समद्दार भी मौजूद रहे।
धरने को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर 294 में से 177 सीटों पर मतगणना में कथित गड़बड़ी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह कठिन समय में अपने कार्यकर्ताओं का साथ नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि जल्द ही भाजपा विरोधी दल दिल्ली में बैठक कर देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।
धरने में वरिष्ठ नेताओं की सीमित उपस्थिति को लेकर अब राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
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