भारत ने महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर संसद भवन परिसर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन ऐतिहासिक था, क्योंकि यह पहली बार था जब महात्मा फुले को संसद में सम्मानित किया गया। यह समारोह संसद भवन के प्रेरणा स्थल पर आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार, लोकसभा अध्यक्ष, सांसद और अन्य विशिष्ट व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे।
महात्मा फुले ने शिक्षा और सामाजिक समानता के क्षेत्र में जो कार्य किए, उसे याद करते हुए नेताओं ने उनकी सराहना की। विशेष रूप से उन्होंने शिक्षा के अधिकार और जातिवाद के खिलाफ जो संघर्ष किया, वह आज भी सामाजिक न्याय पर विचार करते हुए महत्वपूर्ण है।
यह आयोजन भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महात्मा फुले के संदेश को व्यापक रूप से फैलाना था, जिसमें शिक्षा, समानता और सामाजिक सुधार की बात की गई थी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर पूरे वर्षभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की, जो अप्रैल 2026 से अप्रैल 2027 तक होगा। यह समारोह महात्मा फुले की सामाजिक और शैक्षिक विचारधारा को और अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए आयोजित किया जाएगा।
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