संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर 200 से अधिक सेवानिवृत्त नौकरशाहों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इन सभी हस्ताक्षरकर्ताओं ने एक संयुक्त पत्र जारी कर राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि 12 मार्च को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निर्देशों की अनदेखी करते हुए संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। पिछले सप्ताह संसद के ‘मकर द्वार’ के पास एलपीजी मुद्दे को लेकर विरोध किया गया, जिसमें कुछ सांसद नकली ईंट के चूल्हे लेकर नारेबाजी करते दिखे। इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद कोई “पिकनिक स्थल” नहीं है।
पूर्व अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करते हैं, खासकर तब जब इसमें विपक्ष के नेता शामिल हों। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी और अन्य सांसद संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्किट खाते नजर आए, जो संसद की गरिमा के खिलाफ है।
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पत्र में कहा गया कि संसद देश का सर्वोच्च संवैधानिक मंच है और इसे “लोकतंत्र का मंदिर” माना जाता है, जहां गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन इस तरह की गतिविधियां इसे राजनीतिक नाटक का मंच बना देती हैं।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी कहा कि राहुल गांधी का आचरण सार्वजनिक संवाद के स्तर को गिराता है और संसदीय कार्यवाही में बाधा डालता है, जिससे जनता का समय और संसाधन बर्बाद होता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार से सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इस प्रक्रिया में संस्थाओं की साख को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। अंत में, उन्होंने राहुल गांधी से आत्ममंथन करने और देश से माफी मांगने की अपील की।
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