नीति आयोग के गोबर्धन दास ने कहा है कि भारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनने की पूरी वैज्ञानिक क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि देश में अनुसंधान, नवाचार और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है, जो भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बना सकती है।
यह बयान भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित “मेडिकल इनोवेशंस पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री (आई2आई) कनेक्ट” कार्यक्रम के दौरान दिया गया। यह कार्यक्रम भारत का सबसे बड़ा बायोमेडिकल और तकनीकी नवाचार मंच माना जा रहा है।
गोबर्धन दास ने कहा कि भारत में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति ला रही है। उन्होंने बताया कि देश में विकसित हो रही चिकित्सा तकनीकें न केवल भारत की जरूरतों को पूरा करेंगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उपयोगी साबित होंगी।
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उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और शोध संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से नवाचार को उद्योगों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी सुधरेगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स ने अपने-अपने नवाचार प्रस्तुत किए, जिन्हें उद्योग जगत से जोड़ने पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के मंच भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गोबर्धन दास ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान हासिल करेगा और दुनिया के लिए एक नवाचार केंद्र बनकर उभरेगा।
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