नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर में स्थित ऐतिहासिक गौरीपुर जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। मस्जिद में मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य के कारण शनिवार से तीन दिनों के लिए आम लोगों के प्रवेश और नमाज पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। हालांकि, इस फैसले के साथ ही एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और उच्च सुरक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक प्रवेश को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
करीब 130 वर्ष पुरानी यह मस्जिद, जिसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है, एयरपोर्ट की द्वितीयक रनवे से कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। वर्षों से स्थानीय लोग यहां नमाज अदा करने के लिए आते रहे हैं, जबकि यह क्षेत्र एयरपोर्ट के अत्यधिक सुरक्षित परिचालन क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद में निर्माण और मरम्मत कार्य चल रहा है। इसी कारण श्रद्धालुओं के प्रवेश पर दो से तीन दिनों के लिए अस्थायी रोक लगाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि काम पूरा होने के बाद सामान्य व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।
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इस बीच दमदम उत्तर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सौरव सिकदर ने इस मुद्दे पर सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एयरपोर्ट के लेवल-3 सुरक्षा क्षेत्र में सामान्य नागरिकों को बिना उन सुरक्षा प्रक्रियाओं के प्रवेश कैसे दिया जा सकता है, जिनका पालन अन्य लोगों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में आमतौर पर बायोमेट्रिक पास और पहचान सत्यापन के बाद ही प्रवेश की अनुमति मिलती है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित कई विशिष्ट व्यक्तियों की आवाजाही वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में खुला प्रवेश सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने नमाज पर रोक का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह मस्जिद 135 वर्षों से अधिक पुरानी है और इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत जारी है। ऐसे में मरम्मत कार्य के दौरान भी श्रद्धालुओं को नमाज की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
फिलहाल मरम्मत का कार्य कुछ दिनों में पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन एयरपोर्ट के उच्च सुरक्षा क्षेत्र में स्थित इस ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर सुरक्षा और धार्मिक अधिकारों के बीच संतुलन का मुद्दा आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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