केंद्र सरकार ने निर्यातकों को सस्ती और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निर्यात प्रोत्साहन मिशन (एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन–EPM) के तहत दो नई क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं की शुरुआत की है। इन दोनों योजनाओं की घोषणा शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 को की गई। सरकार के अनुसार, इन योजनाओं पर कुल ₹5,181 करोड़ का व्यय किया जाएगा, जो छह वर्षों की अवधि में 2030-31 तक लागू रहेगा।
इन नई पहलों का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों के लिए क्रेडिट तक पहुंच की प्रक्रिया को सरल बनाना और उसकी लागत को कम करना है, ताकि भारतीय निर्यात वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके। खासतौर पर छोटे और मझोले निर्यातकों को इन योजनाओं से राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर महंगे ऋण और जटिल बैंकिंग प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है।
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब कुछ दिन पहले ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन के अंतर्गत एक ‘मार्केट एक्सेस स्कीम’ के लिए दिशा-निर्देश अधिसूचित किए थे। शुक्रवार को दो नई योजनाओं के शुरू होने के साथ ही EPM के तहत कुल 11 प्रस्तावित योजनाओं में से अब तक तीन योजनाएं क्रियान्वित हो चुकी हैं।
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उल्लेखनीय है कि निर्यात प्रोत्साहन मिशन की घोषणा बजट 2025 में की गई थी और इसे नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के माध्यम से निर्यातकों को वित्तीय सहायता, जोखिम प्रबंधन और नए बाजारों तक पहुंच में मदद मिलेगी, जिससे देश के निर्यात को नई गति मिलेगी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में EPM के तहत शेष योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि भारत को एक मजबूत निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया जा सके।
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