केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें फ्लाई ऐश (कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राख) के बड़े पैमाने पर रेलवे नेटवर्क के माध्यम से परिवहन को सक्षम बनाने की महत्वपूर्ण पहल पर चर्चा की गई।
इस बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि फ्लाई ऐश के परिवहन के लिए रेलवे एक अत्यंत प्रभावी, पर्यावरण-अनुकूल और लागत-कुशल माध्यम साबित हो सकता है। सरकार का उद्देश्य औद्योगिक अपशिष्ट के सुरक्षित और व्यवस्थित निपटान को बढ़ावा देना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिले।
रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि देश में बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश का उत्पादन होता है, जिसका उपयोग सीमेंट उद्योग, सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जा सकता है। ऐसे में इसका समय पर और सुचारु परिवहन बेहद आवश्यक है।
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बैठक में यह भी विचार किया गया कि रेलवे नेटवर्क का उपयोग बढ़ाकर सड़क परिवहन पर दबाव कम किया जा सकता है, जिससे ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। यह पहल भारत के हरित परिवहन (ग्रीन ट्रांसपोर्ट) लक्ष्यों के अनुरूप मानी जा रही है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फ्लाई ऐश परिवहन के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक और तकनीकी ढांचे को मजबूत किया जाए, ताकि इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल की उपलब्धता भी बेहतर होगी। यह कदम सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
रेल मंत्रालय आने वाले समय में इस योजना को और विस्तृत रूप देने पर काम कर रहा है, जिससे देशभर में फ्लाई ऐश का सुरक्षित और कुशल परिवहन सुनिश्चित किया जा सके।
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