देश में 7 अगस्त 2026 को 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाएगा। यह दिन भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा, कुशल कारीगरों और उनकी मेहनत को सम्मान देने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में चेन्नई से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की थी।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल भारतीय वस्त्र परंपराओं का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन लाखों बुनकरों के सम्मान का प्रतीक है, जो अपनी कला और मेहनत से देश की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं। इस अवसर पर गुजरात की सदियों पुरानी बुनाई परंपराएं भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
गुजरात की हथकरघा कला अपनी अनोखी डिजाइन, रंग संयोजन और पारंपरिक तकनीकों के लिए प्रसिद्ध है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बुनकर पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं को संरक्षित करते हुए कपड़ों का निर्माण कर रहे हैं। पटोला, बंधनी और अन्य पारंपरिक वस्त्रों ने गुजरात की पहचान को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत किया है।
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सरकार हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनका उद्देश्य बुनकरों को आर्थिक सहायता, बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और उनकी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिलने से भारतीय हथकरघा उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के माध्यम से देश के कारीगरों को प्रोत्साहित किया जाता है और लोगों को स्वदेशी वस्त्रों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाता है। गुजरात सहित देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक बुनाई कलाएं भारत की सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मक क्षमता का प्रमाण हैं।
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