विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (12 जून) के अवसर पर गुजरात में बाल श्रम की रोकथाम, बाल अधिकारों की सुरक्षा और बच्चों के समग्र विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दो दिवसीय अंतरराज्यीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मंगलवार को गांधीनगर स्थित सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (SPIPA) में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुजरात सरकार के मंत्री कुंवरजीभाई बावलिया ने कहा कि सुरक्षित प्रवासन सुनिश्चित करना और बाल श्रम का पूर्ण उन्मूलन केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि पूरी मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना समाज के प्रत्येक वर्ग का कर्तव्य है।
मंत्री ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इससे उनके शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया।
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इस दो दिवसीय संवाद में विभिन्न राज्यों के सरकारी अधिकारियों, बाल अधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बाल श्रम रोकने के उपायों, प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा तक पहुंच और बच्चों के कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि बाल श्रम के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने और बच्चों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित करने की भी आवश्यकता है।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि सुरक्षित प्रवासन की व्यवस्था होने से बच्चों के शोषण और बाल श्रम में फंसने की आशंका कम हो सकती है। विशेषज्ञों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया।
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