मणिपुर के कांगपोकपी जिले में गुरुवार सुबह (8 जनवरी 2026) दो सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी की घटना सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, इस फायरिंग में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। हालांकि, घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF–एस. कामसन) के संदिग्ध कैडर कथित अवैध अफीम की खेती को नष्ट करने के उद्देश्य से खाराम वैफेई इलाके में पहुंचे थे। इसी दौरान उनका सामना सशस्त्र कुकी भूमिगत समूहों से हो गया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। कुछ समय तक चली इस मुठभेड़ के बाद फायरिंग रुक गई।
गोलीबारी की आवाज से इम्फाल पश्चिम जिले के सीमावर्ती गांवों में दहशत और अफरा-तफरी फैल गई। ये गांव कांगपोकपी जिले से सटे हुए हैं और इससे पहले 2023 और 2024 में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर हुई हिंसक झड़पों के गवाह रह चुके हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों को संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में तैनात कर दिया है।
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इस बीच, ZUF (एस. कामसन) ने एक बयान जारी कर कहा कि सुबह करीब 7:40 बजे खाराम वैफेई इलाके में सशस्त्र कुकी समूहों के साथ मुठभेड़ हुई। संगठन का दावा है कि इस क्षेत्र में अवैध गतिविधियां, जैसे अफीम की गैरकानूनी खेती और कुकी ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ समूहों के भूमिगत शिविर स्थापित किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह हिंसा उस समय भड़की थी, जब पहाड़ी जिलों में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में ‘ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च’ निकाला गया था। तब से राज्य में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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