पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2013 के छेड़छाड़ और हमले के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मंजीत सिंह ललपुरा और सात अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। यह फैसला दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद आया है। न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की पीठ ने पंजाब के तरन तारन की अदालत के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें विधायक और अन्य सात लोगों को चार साल की सजा सुनाई गई थी।
इस फैसले में उच्च न्यायालय ने 2013 में तरन तारन पुलिस स्टेशन में आईपीसी और एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को भी खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता महिला, जो अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित थी, ने आरोप लगाया था कि मार्च 2013 में उसे ललपुरा और कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा हमला किया गया था। घटना तब हुई जब शिकायतकर्ता अपने परिवार के साथ एक शादी में शामिल होने के लिए तरन तारन गई थी, और उस समय ललपुरा एक टैक्सी चालक था।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह मामला अधिकतर निजी प्रकृति का है और यह समझौते द्वारा सुलझाया गया है, इसलिए इस मामले को उच्च न्यायालय अपनी अंतर्निहित शक्तियों के तहत खारिज कर सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यह घटना 13 साल पुरानी है और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।
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