हिमाचल प्रदेश में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपना हमला और तेज कर दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य में रियल एस्टेट लॉबी, भूमि माफिया और वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच गहरा गठजोड़ बना हुआ है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
माकपा ने इस मामले में राज्य के कार्यवाहक मुख्य सचिव श्री संजय गुप्ता को तुरंत पद से हटाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि उनके कार्यकाल के दौरान कई ऐसे निर्णय लिए गए हैं जिनसे भूमि सौदों और रियल एस्टेट गतिविधियों को अनुचित लाभ मिला है।
पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की कमी है और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्य के सामान्य नागरिकों के हितों के खिलाफ है और इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
और पढ़ें: हिमाचल विधानसभा ने विधेयक पास किया, दल बदल कानून के तहत अयोग्य एमएलए को पेंशन से वंचित किया जाएगा
माकपा ने यह भी दावा किया कि सरकार इस पूरे मामले पर गंभीरता से कार्रवाई करने में विफल रही है, जिसके कारण जनता में असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी ने मांग की कि इस कथित घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इसके साथ ही पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
हालांकि, इस मामले पर राज्य सरकार या मुख्य सचिव की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।
और पढ़ें: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का 15 दिन का स्टॉक, स्थिति कड़ी हो सकती है