हिमाचल प्रदेश में ईको-टूरिज्म से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस मामले में राज्य के राजस्व मंत्री ने ताजा घटनाक्रम को देखते हुए नए सिरे से जांच के आदेश जारी किए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में भ्रष्टाचार से जुड़े पहलुओं को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) को सौंप दिया गया है। वहीं, धमकी और डराने-धमकाने के आरोपों की जांच पुलिस स्तर पर अलग से की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों पहलुओं की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है ताकि मामले की निष्पक्षता बनी रहे। हालांकि, जांच प्रक्रिया के तरीके और धमकी से जुड़े आरोपों को अलग से देखने के निर्णय को लेकर आलोचना भी सामने आई है।
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स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का कहना है कि धमकी से जुड़े आरोपों को भी गंभीरता से एक ही जांच एजेंसी द्वारा देखा जाना चाहिए था, ताकि पूरे मामले की एक समग्र तस्वीर सामने आ सके।
राजस्व मंत्री के इस आदेश के बाद अब जांच एजेंसियों पर मामले को जल्द और पारदर्शी तरीके से पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। सरकार का कहना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या दबाव की स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला राज्य में ईको-टूरिज्म परियोजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। जांच के नतीजों पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय होगी।
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