हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार को किसानों, श्रमिकों और उनसे जुड़े कई संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ ‘जेल भरो आंदोलन’ किया। यह प्रदर्शन देशव्यापी आंदोलन के तहत आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से मुक्त व्यापार समझौतों, श्रम सुधारों और कथित तौर पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियों का विरोध किया।
प्रदर्शन में किसानों और श्रमिकों के साथ विभिन्न संबद्ध संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों को लेकर अपनी नाराजगी जताई तथा उन्हें आम लोगों, किसानों और कामगारों के हितों के खिलाफ बताया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र की नीतियों में बदलाव की मांग उठाई गई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौतों का असर देश के किसानों और छोटे उत्पादकों पर पड़ सकता है। उनका आरोप है कि ऐसे समझौतों से कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और किसानों की आय पर दबाव पड़ने की आशंका है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
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श्रम सुधारों को लेकर भी संगठनों ने विरोध जताया। उनका कहना है कि श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों से श्रमिकों के अधिकार और रोजगार की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर ऐसी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया, जिनसे बड़े कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचने की संभावना है। उन्होंने सरकार से आम जनता, किसानों और श्रमिकों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
शिमला में हुआ यह प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा था। संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने और केंद्र सरकार पर नीतिगत बदलाव के लिए दबाव बढ़ाने का संकेत दिया।
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