भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत को लेकर स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पहले अनुमान लगाया था कि मानसून केरल में 26 मई तक पहुंच जाएगा, लेकिन अब तक इसकी आधिकारिक शुरुआत नहीं हो पाई है, जिससे देरी साफ दिख रही है।
हालांकि पिछले तीन दिनों में दिल्ली सहित कई राज्यों में बारिश हुई है, लेकिन यह मानसून की बारिश नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार मई में पड़े भीषण गर्मी के कारण बने “हीट डोम” ने वायुमंडल में नमी बढ़ाई, जिससे स्थानीय बारिश हो रही है।
आईएमडी के अनुसार मानसून तभी घोषित होता है जब तीन शर्तें पूरी हों—
केरल के 60% मौसम केंद्रों में लगातार बारिश,
अरब सागर से आने वाली पश्चिमी हवाओं की पर्याप्त गति,
और क्षेत्र में पर्याप्त बादल।
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इस समय बादल और बारिश तो हैं, लेकिन पश्चिमी हवाएं कमजोर हैं, इसलिए मानसून की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आईएमडी ने पहले तारीख 26 मई बताई थी, फिर इसे 28 मई और बाद में 1 जून किया गया। अब अनुमान है कि मानसून 3 जून के बाद केरल पहुंच सकता है, हालांकि 8 जून तक आना सामान्य सीमा में माना जा रहा है।
बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात ने पूर्वी भारत में बारिश बढ़ाई है, लेकिन इससे पश्चिमी हवाएं कमजोर हो गई हैं, जिससे मानसून की गति धीमी पड़ गई है। साथ ही एल नीनो की संभावना भी चिंता बढ़ा रही है।
आईएमडी ने पहले 92% सामान्य बारिश का अनुमान दिया था, जिसे घटाकर अब 90% कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जून की शुरुआत में हवाएं मजबूत हो सकती हैं, जिससे मानसून जल्द केरल पहुंच सकता है। भारत में कृषि, पानी और अर्थव्यवस्था मानसून पर निर्भर हैं, इसलिए इसकी देरी पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
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