भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत बुधवार को हैदराबाद में ब्रिक्स श्रम एवं रोजगार मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की। इस बैठक में सदस्य देशों ने समावेशी, मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार श्रम बाजारों के निर्माण पर चर्चा की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी बदलाव और रोजगार के नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए श्रम क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना था। इस दौरान श्रमिकों के अधिकारों, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार के नए मॉडल पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान भारत ने BRICS CONNECT पहल की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच श्रम और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सहयोग, अनुभव साझा करने और नीतिगत समन्वय को बढ़ावा देना है।
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भारत ने कहा कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वचालन और डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार के कारण रोजगार की प्रकृति बदल रही है। ऐसे में देशों के बीच सहयोग के माध्यम से श्रमिकों को नई परिस्थितियों के लिए तैयार करना आवश्यक है।
बैठक में भाग लेने वाले देशों ने कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और श्रमिकों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।
भारत की ओर से कहा गया कि मजबूत और समावेशी श्रम बाजार किसी भी देश की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है। सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जिससे आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंच सके।
ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत कई अन्य देश शामिल हैं। यह समूह वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।
हैदराबाद में आयोजित इस बैठक को श्रम क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान रोजगार, कौशल और श्रमिक कल्याण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता जताई है।
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