रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार, 23 अगस्त 2026 को कहा कि भारत वैश्विक जहाज निर्माण केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक जहाज निर्माण वाले देशों में पैदा हुए खालीपन का फायदा उठाकर भारत इस क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति बना सकता है।
राजनाथ सिंह कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और यंत्र इंडिया लिमिटेड से जुड़ी पांच विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला डिजिटल माध्यम से रखी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि जहाज निर्माण उद्योग तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इस क्षेत्र में तकनीक का विकास बहुत तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जहाज निर्माण में नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन क्षमता और अत्याधुनिक सुविधाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
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राजनाथ सिंह के अनुसार, वैश्विक जहाज निर्माण उद्योग में कई पारंपरिक देशों की भूमिका में बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत के सामने अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास समुद्री क्षेत्र में विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। देश में जहाज निर्माण की क्षमता बढ़ाने से न केवल रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड की विस्तार योजनाओं को देश की औद्योगिक और रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इन परियोजनाओं से संबंधित बुनियादी ढांचे और उत्पादन सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जाएगा।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच नई तकनीक और आधुनिक उत्पादन प्रणालियों को तेजी से अपनाना होगा। उनका कहना था कि जहाज निर्माण के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति भारत के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। सरकार की कोशिश देश को जहाज निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ वैश्विक बाजार में प्रमुख भागीदार बनाने की है।
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