भारत में मानव पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान ने 80 लाख खुराक का आंकड़ा पार कर लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को इसे देश में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। मंत्रालय के अनुसार, हर टीकाकरण देश की बेटियों को स्वस्थ और कैंसर मुक्त भविष्य की ओर ले जाने वाला एक और कदम है।
एचपीवी एक ऐसा वायरस है, जिसका संक्रमण सर्वाइकल कैंसर सहित कुछ अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। एचपीवी वैक्सीन संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करती है और खासतौर पर सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को किशोरियों के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यदि गलत टीकाकरण का कोई मामला सामने आता है तो मुआवजे के सामान्य नियम लागू होंगे।
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अदालत ने याचिका में उचित आधार और सद्भावना की कमी की टिप्पणी भी की। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनका विरोध टीके से नहीं, बल्कि अभियान के क्रियान्वयन और टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी तथा मुआवजे की व्यवस्था को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई से इनकार के बाद वकील ने इसे वापस ले लिया और मामला वापस ली गई याचिका के रूप में खारिज कर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। अभियान के तहत एकल-खुराक वाली गार्डासिल-4 क्वाड्रिवैलेंट एचपीवी वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एचपीवी के प्रकार 16 और 18 से सुरक्षा देती है, जो सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। यह वैक्सीन एचपीवी के प्रकार 6 और 11 से भी बचाव करती है।
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