भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र ने पिछले एक दशक में बड़ी प्रगति दर्ज की है। रक्षा उत्पादन 2014 के करीब 46 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर अब लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। वहीं, रक्षा निर्यात भी करीब 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 39,000 करोड़ रुपये हो गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में यह जानकारी दी।
राजनाथ सिंह ने 57 साल पुरानी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) में नए टैंक ओवरहाल केंद्र की आधारशिला भी रखी। करीब 472 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का उद्देश्य देश में ही भारतीय सेना के बख्तरबंद वाहनों के रखरखाव, मरम्मत और आधुनिकीकरण की क्षमता बढ़ाना है।
2028-29 तक 50 हजार करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य
राजनाथ सिंह ने कहा कि घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धि भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाती है। सरकार ने 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
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उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा क्षमता अब केवल हथियार और गोला-बारूद बनाने तक सीमित नहीं है। देश सैन्य उपकरणों के रखरखाव, बड़े स्तर पर मरम्मत और आधुनिकीकरण की क्षमता भी विकसित कर रहा है। इससे सैन्य तैयारियों को मजबूत करने और विदेशी सहायता पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
हर साल 80 टैंकों का होगा ओवरहाल
जबलपुर में बनने वाली नई सुविधा में टी-72 और टी-90 टैंकों का ओवरहाल किया जाएगा। इसके चालू होने के बाद यहां हर साल करीब 80 टैंकों का ओवरहाल किया जा सकेगा। भारतीय सेना को हर वर्ष लगभग 230 ऐसे टैंकों के ओवरहाल की जरूरत होती है।
फिलहाल अवाडी स्थित हेवी व्हीकल फैक्ट्री हर साल करीब 150 टैंकों का ओवरहाल करती है। नई जबलपुर सुविधा बाकी जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रक्षा मंत्री ने परियोजना को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाती है और इससे सैनिकों को बेहतर परिचालन सहायता मिलेगी।
जबलपुर में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
नई टैंक ओवरहाल सुविधा से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है। यह परियोजना आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) के तहत संचालित व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में विकसित की जा रही है।
व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर की स्थापना 1969 में हुई थी। शुरुआत में यहां जर्मनी की मैन के सहयोग से शक्तिमान तीन टन वाहन बनाए गए। इसके अलावा जापान की निसान मोटर्स के सहयोग से निसान-1टी और जोंगा वाहनों का भी उत्पादन किया गया। मुख्य फैक्ट्री परिसर करीब 330 एकड़ में फैला है, जबकि आसपास का एस्टेट लगभग 600 एकड़ क्षेत्र में है।
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